विद्यार्थियों में योग शिक्षा का महत्व

1544

दोस्तों, आज हम अपने आलेख में यह बताने जा रहे है की योग शिक्षा का महत्व क्या है। जिस तरह शिक्षा के बिना जीवन अधूरा है ठीक उसी तरह योग के बिना अच्छे स्वास्थ्य की कल्पना भी बेकार है। वैज्ञानिक अविष्कारों के इस युग में शरीर को फिट रखने के लिए असंख्य संसाधन मौजूद है लेकिन क्या यह साधन सभी के लिए समान रूप से उपलब्ध है, नहीं!! क्योंकि यह विलास सामग्री हैं जिसका आनंद कुछ लोग ही ले पाते हैं। लेकिन योग सभी के लिए समान रूप से उपलब्ध है, इसमें किसी भी तरह का कोई खर्चा नहीं है। योग का आनंद और स्वास्थ्य लाभ सभी व्यक्ति समान रूप से उठा सकते है बस जरूरत है सही तरह से योग को सीखने की।

विलासिता के सभी साधन होते हुए भी लोग स्वस्थ जीवन को नहीं जी पा रहे जिसका बहुत बड़ा कारण हमारी जीवनशैली और हमारी मानसिकता भी है। स्वस्थ जीवन को अपनाने के लिए योग का संपूर्ण ज्ञान आवश्यक है, क्योंकि अधूरा ज्ञान कभी भी हितकर नहीं होता। शारीरिक, मानसिक या आध्यात्मिक संस्कृति के रूप में योगासनों का इतिहास समय की अनंत गहराइयो में छिपा हुआ है। योगाभ्‍यास केवल वयस्‍कों के लिए ही नही बल्कि टीनएजर और बच्‍चों के लिए भी है।

विद्यार्थियों के लिए योग बहुत ही लाभदायक माना गया है इससे बच्चों के मन-मस्तिष्क में स्थिरता आती है और बच्चों को अपनी पढ़ाई में ध्यान केंद्रित करने में भी सहायता मिलती है। योग के चमत्कार को तो पूरी दुनिया ने स्वीकार किया है इसी वजह से दुनिया के अधिकांश देशों में योग शिक्षा को अनिवार्य किया गया है। योग के प्रभाव को देखते हुए आज चिकित्सक एवं वैज्ञानिक योग के अभ्यास की सलाह देते हैं। योग साधु-संतो के लिए ही नहीं है समस्त मानव जाती के लिए आवश्यक है, विशेषकर छात्र जीवन के लिए तो बहुत ही आवश्यक है।

योग सभी को समान लाभ देता है इसलिए योग का अभ्यास तो सभी को करना चाहिए। इस आलेख से हम आपको यह बताना चाहते है की विद्यार्थियों के लिए योग शिक्षा क्‍यों जरूरी है।

1. छात्रों के लिए जरूरी है योग – योग शिक्षा जितनी कम उम्र से ली जाये, उतना ही शरीर को ज्यादा लाभ मिलता है। बच्चों का शरीर बड़ों की तुलना में ज्यादा लचकदार होता है इसलिए बच्चे चीजों को जल्दी और आसानी से सिख जाते हैं। स्वास्थ्य सहलाकार योग की सलाह देते रहते है लेकिन समय रहते अनुसरण ना किया जाए तो बाद में बच्चे सुनते नहीं हैं। आज की तुलना में पहले के बच्चों के पास घर से बाहर खेलने के कई मौके होते थे लेकिन आज के बच्चे गैजेट्स के अलावा और कही अपना ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते, जिस कारण बच्चों में शिक्षा के प्रति भी उदासीनता देखी जा रही है जिसका मूल कारण है तन-मन का अस्वस्थ होना। स्वस्थ शरीर में स्वस्थ शिक्षा का निवास सम्भव है और यह काम योग से संभव है। योग से शरीर को रोगों से मुक्ति मिलती है और मन को शक्ति देता है। योग बच्चों के मन-मस्तिष्क को उसके कार्य के प्रति जागरूक करता है।

2. दृढ़ता एवं एकाग्रता को बढ़ाता है योग – जिन विद्यार्थियों में पढ़ाई के प्रति अरुचि या मन ना लगना जैसी समस्या होती है उन विद्यार्थियों के लिए योगक्रिया चमत्कार जैसा काम करती है। सुबह के वक्त योग करने से विद्यार्थियों में एकाग्रता और दृढ़ता बेहतर होती है। इससे तन-मन स्वस्थ और निरोग रहता है और बच्चे सभी क्षेत्र में अव्वल रहते हैं। योग के निरंतर अभ्यास से विद्यार्थियों में पढ़ाई की भावना प्रबल होती है।

3. मन को आत्मविश्वास से भरता है – आजकल के बच्‍चों को पढ़ाई और प्रतियोगिता का बोझ बचपन से ही उठाना पड़ता है। बचपन से ही उनमें जीत की ऐसी भावना भर दी जाती है कि जब वे हारते हैं तो यह वो सहन नहीं कर पाते और अपना आत्मविश्वास खो बैठते है और अपने मन से भी कमजोर हो जाते है, इसलिए विद्यार्थियों को शुरू से योग शिक्षा देना बहुत आवश्यक है। योग से बच्चों की सहनशीलता बढ़ती है और मन शक्तिशाली होता है। योगाभ्यास से मन-मस्तिष्क का संतुलन बना रहता है जिससे दुःख-दर्द-समस्याओँ को सहन करने की शक्ति प्रदान होती है। योग विद्यार्थियों को आगे बढ़ने की और आत्मविश्वास को बढ़ाने की शक्ति देता है।

4. बुद्धि तेज होती है – वैसे तो मार्केट में कई तरह के टॉनिक उपलब्ध है दिमाग को तेज करने के लिए, जो की महज एक छलावा से ज्यादा और कुछ नहीं है लेकिन योग एक प्राकृतिक साधन है जिसका कोई मुकाबला नहीं। सही खानपान और नियमित योगक्रिया से दिमाग को तेज करने में मदद मिलती है जिससे बच्चों में बचपन से ही अच्छी सोच का विकास होता है और वे सदा सकारात्मक बनते है। अपने बच्चों को योग का ज्ञान दें और उनकी बुद्धि को तेज करने में अपना योगदान दे।

5. व्यसनों से निजात मिलती है – अधिकांश विद्यार्थियों को अपने शिक्षाकाल में ही बुरी संगत और बुरी लत लग जाती है जो उनके भविष्य के लिए बहुत ही हानिकारक साबित होते है। मादक द्रव्य का स्वास्थ्य पर इतना बुरा असर पड़ता है की बच्चे अपनी राह भटक जाते है। लेकिन योग का नियमित अभ्यास इन व्यसनों से छुटकारा दिलाने में सक्षम है क्योंकि योग से मन-मस्तिष्क की चेतना जागृत होती है और बच्चों को अच्छी व गलत आदत का आभास होने लगता है। आपके बच्चे मादक द्रव्य से पूर्णरूप से दूर रहे उसके लिए उन्हें बचपन से ही योग की शिक्षा दें।

6. लक्ष्य प्राप्ति में सहायक – योग का अभ्यास व्यक्तियों में छुपी हुई शक्तियों को जागृत करता है इसलिए वर्तमान परिवेश में शिक्षा जगत में योग की शिक्षा अनिवार्यता है। क्योंकि छात्र योग के बल पर अपने मस्तिष्क को शुद्ध करके विचार शक्ति को बढ़ा सकते है जिससे छात्रों को लक्ष्य प्राप्ति में सहायता मिलती है। जो बच्चे शुरू से ही योग करते है वे अपने व्यवहार तथा कार्यो से दूसरों को प्रेरणा देते है। योग की सहायता से बच्चे अपने लक्ष्य को जल्दी भेद पाते है। जो लोग अपनी मंजिल तक नहीं पहुँच पाते और यदि उन्हें जीवन में लक्ष्य की प्राप्ति करनी है तो योग का अभ्यास आवश्यक है।

छात्रों को अपने जीवन निर्माण में योग का सहारा जरूर लेना चाहिए। योग आपकी शिक्षा में विकास करता है, सही मार्ग दिखाता है और आपको हर तरह से सक्षम बनाता है। क्योंकि योग से शरीर निरोग रहता है और निरोगी काया जीवन के किसी भी पड़ाव को पार कर सकती है। अंत में हम यही कहेंगे योगाभ्यास सभी को करना चाहिए लेकिन बच्चों को योग की शिक्षा बचपन से दे जिससे वे बड़े होकर एक स्वस्थ और कुशल नागरिक बन सके।

आपको हमारी जानकारी कैसी लगी? अपनी राय जरूर दें।

“जानिए योग क्या है और कैसे हुई इसकी उत्पत्ति ?”
“जानिए थायराइड क्या होता है और योग के जरिये कैसे करें इसका इलाज”
“योग का जीवन में महत्व और लाभ”

Add a comment