विदुर नीति क्या है?

आइये जानते हैं विदुर नीति क्या है। महाभारत के युद्ध से जुड़ी कहानियां और प्रसंग आपने भी जरुर देखे-सुने होंगे और महाभारत के हर किरदार से आप परिचित भी होंगे लेकिन क्या आप विदुर को जानते हैं जो महाभारत युद्ध के भयंकर परिणाम के बारे में पहले से ही जानते थे।

महात्मा विदुर अपनी नीतियों के लिए विख्यात हैं और उनकी बताई विदुर नीति आपके जीवन को भी सरल और सहज बनाने में मदद कर सकती है। ऐसे में क्यों ना, आज विदुर नीति के बारे में बात की जाये। तो चलिए, आज आपको बताते हैं विदुर नीति के कुछ प्रसिद्ध आदर्श वचन।

विदुर नीति क्या है?

  • विदुर नीति असल में महाभारत युद्ध से पहले, युद्ध के परिणाम को लेकर भयभीत हुए हस्तिनापुर के महाराज धृतराष्ट्र के साथ उनके सलाहकार विदुर का संवाद है।
  • ये नीति केवल महाभारत युद्ध तक सीमित नहीं थी बल्कि ये जीवन में किये जाने वाले आचरण और व्यवहार के बारे में भी एक उत्तम दिशा निर्देशक सिद्ध होती है।
  • महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित ‘महाभारत’ के उद्योग पर्व में इस चर्चा का वर्णन मिलता है। ये सम्पूर्ण पर्व विदुर नीति के नाम से सुविख्यात है।

आइये, अब आपको विदुर नीति के आदर्श वचन बताते हैं–

  • महात्मा विदुर कहते हैं कि जिस धन को अर्जित करने में मन और शरीर को तकलीफ हो, शत्रु के सामने सिर झुकाने की बाध्यता आये, धर्म का उल्लंघन हो, ऐसे धन को प्राप्त करने का विचार त्याग देना ही उपयुक्त है।
  • परायी स्त्री का स्पर्श, पराये धन का हरण, मित्रों का त्याग, ये तीनों दोष क्रमशः काम, लोभ और क्रोध से उत्पन्न होते हैं।
  • बुद्धिमान व्यक्ति के प्रति अपराध करके कोई दूर जाकर भी चैन से ना बैठे क्योंकि बुद्धिमान व्यक्ति की बांहें लम्बी होती है और समय आने पर वह अपना बदला लेता है।
  • क्षमा को दोष नहीं मानना चाहिए, निश्चय ही क्षमा परम बल है। क्षमा निर्बल मनुष्यों का गुण है और बलवानों का भूषण है।
  • जो विश्वास का पात्र नहीं है, उसका तो कभी विश्वास करना ही नहीं चाहिए लेकिन जो विश्वास के योग्य है उस पर भी ज्यादा विश्वास नहीं करना चाहिए। विश्वास से जो भय उत्पन्न होता है वो मूल उद्देश्य का भी नाश कर देता है।
  • काम, क्रोध और लोभ ये तीनों ही दुखों की ओर जाने का मार्ग है। ये तीनों आत्मा का नाश करने वाले हैं इसलिए इनसे हमेश दूर रहना चाहिए।
  • इन छह प्रकार के व्यक्ति हमेशा दुखी रहते हैं- ईर्ष्या करने वाला, दूसरों से घृणा करने वाला, असंतुष्ट, क्रोध करने वाला, शंकालु और पराश्रित।
  • मनुष्य को इन पांचों की बड़े यत्न से सेवा करनी चाहिए – पिता, माता, अग्नि, आत्मा और गुरु।
  • केवल धर्म ही परम कल्याणकारक है, केवल क्षमा ही शांति का सर्वश्रेष्ठ उपाय है। विद्या ही परम संतोष देने वाली है और अहिंसा ही सुख देने वाली है।
  • शक्तिशाली होने पर भी क्षमा करने वाले और निर्धन होने पर भी दान करने वाले पुरुष स्वर्ग के भी ऊपर स्थान पाते हैं।
  • मनुष्य अकेला पाप करता है और बहुत से लोग उसका आनंद उठाते हैं। आनंद उठाने वाले तो बच जाते हैं लेकिन पाप करने वाला दोष का भागी बनता है।
  • ये संभव है कि किसी धनुर्धर द्वारा छोड़ा गया बाण किसी एक को भी मारे या ना मारे, मगर बुद्धिमान व्यक्ति द्वारा प्रयुक्त की गयी बुद्धि राजा के साथ सम्पूर्ण राष्ट्र का विनाश कर सकती है।
  • जो व्यक्ति धन, विद्या और ऐश्वर्य को पाकर भी घमंड नहीं करता, वह पंडित कहलाता है।
  • जो अपना आदर सम्मान होने पर खुशी से फूलता नहीं है और अनादर होने पर क्रोधित नहीं होता और जिसका मन अशांत नहीं होता, वह ज्ञानी कहलाता है।
  • संसार के ये सुख प्रमुख हैं- धन की प्राप्ति, अच्छा स्वास्थ्य, वश में रहने वाले पुत्र, प्रिय बोलने वाली भार्या और मनोरथ पूर्ण कराने वाली विद्या।

उम्मीद है जागरूक पर विदुर नीति क्या है कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी।

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