विक्रम संवत् का इतिहास

मई 15, 2018

भारतीय हिन्दू नववर्ष विक्रम संवत् 2075  शुरू हो चुका है। इसे नव संवत्सर भी कहा जाता है। ईसा मसीह से 57 साल पहले शुरू हुए इस संवत् का विशेष महत्त्व भी है और इसका अपना इतिहास भी है। ऐसे में आप भी अपने इस भारतीय नववर्ष के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानने के इच्छुक होंगे। तो चलिए, आज आपको बताते हैं विक्रम संवत् के बारे में–

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होने वाला ये हिन्दू नववर्ष सृष्टि का प्रथम दिवस माना जाता है क्योंकि ब्रह्मपुराण के अनुसार इसी दिन भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि का निर्माण शुरू किया था। इसकी काल गणना बहुत प्राचीन है जिसके अनुसार सृष्टि के प्रारम्भ से अब तक 1 अरब, 95 करोड़, 58 लाख, 85 हजार, 111 वर्ष बीत चुके हैं।

विक्रम संवत् का कैलेंडर ग्रेगरी कैलेंडर से 57 साल पहले शुरू हुआ था। ये विक्रम संवत् महाराजा विक्रमादित्य की वीर गाथा से जुड़ा है। महाराजा विक्रमादित्य ने भारतवर्ष से शकों को खदेड़ बाहर किया था जिसके बाद उन्हें ‘शकारि’ की उपाधि मिली और इस विजय के बाद ही विक्रम संवत् की शुरुआत हुयी। कहा जाता है कि इस दिन विक्रमादित्य ने अपनी जनता को कर्ज मुक्त कर दिया था।

भारतीय परम्पराओं में विक्रम संवत् को ‘राष्ट्रीय  संवत्’ माना जाता है। इस संवत् के इतिहास का स्रोत 9 वीं सदी के पहले के इतिहास में नहीं मिलता है जबकि बहुत प्राचीन स्रोतों में इस संवत् का जिक्र कर्त (सन 343 से 371), कृता (सन 404) और मालवा (सन 424) नाम से मिलता है और इस काल को केवल ‘संवत्’ भी कहा जाता था।

इस हिन्दू नववर्ष को लेकर भारतीय विद्वानों में कुछ मतभेद हैं और इसकी उत्पत्ति को लेकर भी कुछ हद तक संशय बरकरार है। कुछ लेखकों के अनुसार विक्रम संवत् का महाराज विक्रमादित्य से कोई सम्बन्ध नहीं है जबकि कुछ इतिहासकार मानते हैं कि राजा चन्द्रगुप्त द्वितीय ने विक्रमादित्य की उपाधि धारण की थी और अपने शासनकाल को विक्रम संवत् काल घोषित किया था, जबकि कुछ तथ्य बताते हैं कि विक्रम  संवत् के प्रणेता नेपाल के लिच्छव वंश के प्रथम राजा धर्मपाल भूमिवर्मा विक्रमादित्य हैं। इस तथ्य की पुष्टि गुजरात के खोजकर्ता पंडित भगवान लाल इन्द्रजी ने भी की है।

ब्रिटिश-जर्मन प्राच्यविद रुडोल्फ होएर्नले के अनुसार मालवा के राजा यशोधर्मन ने कश्मीर पर विजय प्राप्त करने के बाद इस काल का नाम परिवर्तित किया।

विक्रम संवत् हिन्दू पंचांग में समय गणना की प्रणाली भी है। बारह महीने का एक साल और सात दिन का एक सप्ताह रखने का प्रचलन विक्रम संवत् से ही शुरू हुआ था। इस संवत् में महीने का निर्धारण सूर्य और चन्द्रमा की गति के आधार पर होता है।

ये संवत् नेपाल का आधिकारिक संवत् है जो आज भी वहाँ का राष्ट्रीय संवत् है।

दोस्तों,विक्रम संवत् की उत्पत्ति को लेकर भले ही संशय बरकरार है लेकिन इससे विक्रम संवत् का महत्त्व कम नहीं हो जाता बल्कि हम भारतीय हर वर्ष बड़ी धूमधाम से इस हिन्दू नववर्ष को मनाते हैं। हमारा ये नया हिन्दू नववर्ष कुछ दिन पहले यानि 18 मार्च 2018 से ही शुरू हुआ है जिसकी आप सभी को हार्दिक शुभकामनायें!

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