विटामिन डी की कमी के लक्षण

आजकल हमारी लाइफस्टाइल में आये बदलाव के कारण हम धूप में बाहर निकलना ही नहीं चाहते। दिन का ज़्यादातर समय बंद कमरों में बिताने की हमारी इसी आदत के कारण हमारे शरीर में विटामिन डी की कमी होने लगी है और आज हालात ऐसे है कि हम में से अधिकांश लोग इसकी कमी से ग्रस्त हैं। अगर आप शाकाहारी हैं तो आपके लिए मुश्किल और भी बढ़ सकती है क्योंकि शाकाहार में विटामिन डी के बहुत सीमित सोर्स मौजूद हैं।

विटामिन डी का सबसे अच्छा सोर्स तो सूरज का प्रकाश ही है यानि धूप सेकने से ही इस विटामिन की पर्याप्त मात्रा शरीर को मिल जाती है। लेकिन धूप से बचने की हमारी कोशिशों के चलते हमारे शरीर में विटामिन डी की कमी हो जाने से कई बीमारियां डेरा डाल लेती हैं। ऐसे में इसकी कमी के लक्षणों की पहचान करना और इस विटामिन की कमी से होने वाली बीमारियों के बारे में जानना बेहद ज़रूरी हो जाता है। तो चलिए, आज बात करते हैं विटामिन डी की कमी से होने वाले प्रभावों की –

विटामिन डी की कमी के लक्षण–

मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द – विटामिन डी की कमी से मांसपेशियों में खिंचाव रहने लगता है और हड्डी और जोड़ों में भी दर्द होने लगता है।

पसीना ज़्यादा आना – अगर आपको सामान्य से ज़्यादा पसीना आने लगा है तो ये आपके शरीर में विटामिन डी की कमी का एक लक्षण भी हो सकता है।

आलस और थकान महसूस होना – अगर आपको ज़्यादातर समय थकान महसूस होती है तो इसका एक कारण आपके शरीर में विटामिन डी की कमी भी हो सकता है।

उदासी बने रहना – अगर आप अक्सर उदास और सुस्त रहते हैं और किसी काम में आपका मन नहीं लगता तो ये विटामिन डी की कमी का संकेत हो सकता है। थोड़ी-थोड़ी देर में मूड बदलना और टेंशन में रहना इस विटामिन की कमी के कारण हो सकता है।

घाव ठीक होने में ज़्यादा समय लगना – किसी चोट या इन्फेक्शन से हुआ घाव यूँ तो जल्दी भर जाया करता है लेकिन अगर शरीर में विटामिन डी की कमी हो गयी है तो ये घाव भरने में काफी समय लेता है।

जल्दी-जल्दी बीमार होना – अगर आप जल्दी-जल्दी बीमार हो जाते हैं और ठण्ड लगना, निमोनिया और ब्रोंकाइटिस जैसे वायरस और बैक्टीरियल इन्फेक्शन होने पर जल्दी ठीक नहीं हो पाते हैं तो ये शरीर में विटामिन डी की कमी के कारण हो रहा है।

मसूड़ों में सूजन – अगर आपके मसूड़ों में सूजन रहने लगी है या मसूड़े कमजोर होने लगे हैं तो इसका कारण विटामिन डी की कमी हो सकती है।

मोटापा – अगर आप वजन बढ़ने से परेशानी महसूस कर रहे हैं तो हो सकता है कि इसका कारण शरीर में विटामिन डी की कमी हो क्योंकि शोध से पता चला है कि इसकी कमी से वजन बढ़ता है, खासकर महिलाओं में इसकी कमी से तेज़ी से वजन बढ़ने लगता है।

विटामिन डी की कमी से होने वाले रोग–

रिकेट्स – विटामिन डी की कमी से रिकेट्स या सूखा रोग हो जाता है जिसमें हड्डियां कमजोर हो जाती है जिससे शरीर के अंग सीधे ना होकर टेढ़े-मेढ़े हो जाते हैं। बच्चों में होने वाले इस रोग में बच्चे को चलने और उठने-बैठने में दिक्कत होती है।

ऑस्टियोपोरेसिस – विटामिन डी हमारे शरीर में कैल्शियम के निर्माण और अवशोषण के लिए बहुत ज़रूरी होता है और शरीर में कैल्शियम की पर्याप्त मात्रा होने पर ही हड्डियां मजबूत बनती हैं लेकिन विटामिन डी की कमी होने से शरीर में कैल्शियम की भी कमी हो जाती है जिससे हड्डियां कमज़ोर होने लगती है और ऑस्टियोपोरेसिस रोग भी हो सकता है।

हाई ब्लड प्रेशर – विटामिन डी की कमी होने पर हाई ब्लड प्रेशर रहने लगता है जो दिल की सेहत को भी नुकसान पहुंचाता है।

हृदय रोग – विटामिन डी की कमी से हाई ब्लड प्रेशर रहने लगता है जो हृदय से जुड़े कई रोग साथ लेकर आता है। इसकी कमी से दिल का दौरा भी पड़ सकता है जिससे जान भी जा सकती है।

डायबिटीज – विटामिन डी की कमी से ब्लड शुगर का लेवल भी काफी बढ़ जाता है जो डायबिटीज का कारण बनता है।

इसके अलावा विटामिन डी की कमी से अस्थमा, टीबी और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां भी हो सकती हैं।

अब आप जान चुके हैं कि विटामिन डी हमारे शरीर के लिए कितना ज़रूरी होता है और इसका सबसे अच्छा सोर्स धूप है। इसलिए विटामिन डी की टेबलेट्स लेने की बजाए हर दिन 15 -20 मिनट धूप सेकिये और अपनी डाइट में डेयरी प्रोडक्ट्स और सोया मिल्क, संतरे का जूस, गाजर और मशरूम शामिल कर लीजिये, इसके अलावा अंडे का पीला भाग, मछली, कॉड लीवर ऑयल भी विटामिन डी के अच्छे स्रोत हैं।

हमने आपसे सिर्फ ज्ञानवर्धक जानकारी साझा की है। कोई भी प्रयोग आजमाने से पहले अपनी सूझ-बुझ का इस्तेमाल जरूर करे। सदैव खुश रहे और स्वस्थ रहे।

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