विवाह प्रमाणपत्र कैसे बनवाएं और क्या है इसके फायदे

विवाह जीवन को एक नया रुख देता है और इससे जुड़े होते हैं अधिकार और कर्तव्य। जिम्मेदारियों के ताने-बाने से सजे विवाह का जितना महत्व होता है उतना ही महत्व विवाह प्रमाणपत्र बनवाने का भी होता है। शादी से जहाँ अनेक अधिकार मिलते हैं वहीँ विवाह का पंजीकरण उन अधिकारों की सुरक्षा में सहायक होता है। ऐसे में ये जान लेना ज़रूरी है कि विवाह प्रमाणपत्र बनवाना क्यों ज़रूरी है और इससे क्या फायदे होते हैं। तो चलिए, आज जानते हैं विवाह प्रमाणपत्र के फायदों के बारे में –

विवाह प्रमाणपत्र के फायदे –

  • भारतीय कानून के अनुसार ये प्रमाणपत्र आपके विवाहित होने का मान्य कानूनी प्रमाण होता हैं।
  • बैंक में खाता खोलने के लिए
  • पासपोर्ट बनवाने के लिए
  • ट्रेवल वीजा या किसी दूसरे देश में स्थायी रूप से निवास करने के लिए आवेदन करने के दौरान विवाह प्रमाणपत्र काफी सहायक होता है।
  • जीवन बीमा से सम्बंधित फायदे लेने के लिए भी विवाह प्रमाणपत्र ज़रूरी होता है।
  • पति-पत्नी के बीच दहेज, तलाक और गुजाराभत्ता जैसे मसलों पर विवाद होने की स्थिति में विवाह प्रमाणपत्र काफी फायदेमंद साबित होता है।
  • विवाह प्रमाणपत्र महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा दिलाता है। शादीशुदा हो या तलाकशुदा, दोनों ही स्थितियों में विवाह प्रमाणपत्र काम आता है।
  • बाल विवाह पर लगाम लगाने में भी विवाह प्रमाणपत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है क्योंकि शादी की उम्र से पहले
  • शादी कर लेने की स्थिति में विवाह प्रमाणपत्र नहीं बनता है।
  • शादी के बाद धोखाधड़ी करने की स्थिति में, विवाह प्रमाणपत्र दोषी को पकड़ने और सजा दिलाने में सहायक होता है।

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विवाह प्रमाणपत्र कैसे बनवाएं – हिन्दू मैरिज एक्ट 1955 या स्पेशल मैरिज एक्ट 1954 के तहत विवाह का पंजीकरण करवाना काफी आसान है। इसके लिए पति-पत्नी जहाँ रहते हैं वहां के सबडिविजनल मजिस्ट्रेट के दफ्तर में अर्जी देनी होती है जिस पर दोनों के हस्ताक्षर हों। अर्जी के साथ संलग्न दस्तावेजों की जांच होती है और शादी के लिए निर्धारित किये गए दिन को विवाह का पंजीकरण हो जाता है और गैज़ेटेड अफसर की उपस्थिति में प्रमाणपत्र दे दिया जाता है।

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विवाह पंजीकरण के लिए आवश्यक दस्तावेज –

  • इसके लिए आवेदन पूरा भरा हो, साथ ही पति-पत्नी और उनके माता-पिता के हस्ताक्षर होने भी ज़रूरी हैं।
  • पति-पत्नी के जन्म प्रमाणपत्र, दो पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ, शादी का एक फोटो और राशन कार्ड, वोटर आईडी कार्ड, पासपोर्ट या ड्राइविंग लाइसेंस में से कोई एक प्रमाणपत्र।
  • अगर विवाह किसी धार्मिक स्थल पर हुआ हो तो वहां के पंडित या पुरोहित द्वारा बनाया गया विवाह प्रमाणपत्र।
  • 10 रुपये के नॉन-ज्यूडिशियल स्टाम्प पेपर पर पति और पत्नी द्वारा अलग-अलग एफिडेविट।
  • किसी विदेशी से शादी करने की स्थिति में उस व्यक्ति के देश की एम्बेसी से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफ़िकेट।
  • सभी सेल्फ अटेस्टेड दस्तावेजों के साथ शादी का एक निमंत्रण पत्र भी संलग्न करना होता है।

विवाह के महत्व से आप परिचित हैं और अब आप विवाह के पंजीकरण और प्रमाणपत्र के महत्व को भी जान चुके हैं इसलिए विवाह की सभी महत्वपूर्ण रस्मों में, विवाह प्रमाणपत्र बनवाने को भी एक ज़रूरी रस्म समझिये जो आपके वैवाहिक अधिकारों की सुरक्षा भी करती है और आपके रिश्ते को कानूनी मान्यता भी प्रदान करवाती है।

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