विवाह प्रमाणपत्र कैसे बनवाएं और क्या है इसके फायदे

दिसम्बर 9, 2017

विवाह जीवन को एक नया रुख देता है और इससे जुड़े होते हैं अधिकार और कर्तव्य। जिम्मेदारियों के ताने-बाने से सजे विवाह का जितना महत्व होता है उतना ही महत्व विवाह प्रमाणपत्र बनवाने का भी होता है। शादी से जहाँ अनेक अधिकार मिलते हैं वहीँ विवाह का पंजीकरण उन अधिकारों की सुरक्षा में सहायक होता है। ऐसे में ये जान लेना ज़रूरी है कि विवाह प्रमाणपत्र बनवाना क्यों ज़रूरी है और इससे क्या फायदे होते हैं। तो चलिए, आज जानते हैं विवाह प्रमाणपत्र के फायदों के बारे में-

विवाह प्रमाणपत्र के फायदे –

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विवाह प्रमाणपत्र कैसे बनवाएं – हिन्दू मैरिज एक्ट 1955 या स्पेशल मैरिज एक्ट 1954 के तहत विवाह का पंजीकरण करवाना काफी आसान है। इसके लिए पति-पत्नी जहाँ रहते हैं वहां के सबडिविजनल मजिस्ट्रेट के दफ्तर में अर्जी देनी होती है जिस पर दोनों के हस्ताक्षर हों। अर्जी के साथ संलग्न दस्तावेजों की जांच होती है और शादी के लिए निर्धारित किये गए दिन को विवाह का पंजीकरण हो जाता है और गैज़ेटेड अफसर की उपस्थिति में प्रमाणपत्र दे दिया जाता है।

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विवाह पंजीकरण के लिए आवश्यक दस्तावेज-

विवाह के महत्व से आप परिचित हैं और अब आप विवाह के पंजीकरण और प्रमाणपत्र के महत्व को भी जान चुके हैं इसलिए विवाह की सभी महत्वपूर्ण रस्मों में, विवाह प्रमाणपत्र बनवाने को भी एक ज़रूरी रस्म समझिये जो आपके वैवाहिक अधिकारों की सुरक्षा भी करती है और आपके रिश्ते को कानूनी मान्यता भी प्रदान करवाती है।

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