वृन्दावन के पर्यटन स्थल

आइये जानते हैं वृन्दावन के पर्यटन स्थल के बारे में। श्री कृष्ण की लीलास्थली वृन्दावन ही वो स्थान है जहाँ भगवान कृष्ण ने बाल लीलाएँ की थी। मथुरा से 15 किमी. दूर स्थित इस पवित्र स्थान पर राधा-कृष्ण के बहुत-से मंदिर है, जहाँ दर्शन करके मन आनंद से भर जाता है।

ऐसे में क्यों ना, आज आपको वृन्दावन के ऐसे खास पर्यटन स्थलों के बारे में बताया जाये जहाँ आपको जरूर जाना चाहिए। तो चलिए, जागरूक पर आज वृन्दावन के पर्यटन स्थल चलते हैं।

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वृन्दावन के पर्यटन स्थल

इस्कॉन मंदिर – श्री कृष्ण-बलराम के इस मंदिर का निर्माण 1975 में किया गया था। ऐसा माना जाता है कि ये मंदिर उसी स्थान पर बना है जहाँ आज से करीब 5000 साल पहले कृष्ण अपने मित्रों के साथ खेला करते थे।

प्रेम मंदिर – लगभग 100 करोड़ की लागत से बने इस मंदिर के निर्माण में 11 साल का समय लगा। इसके निर्माण में इटैलियन करारा संगमरमर का इस्तेमाल किया गया और राजस्थान और उत्तरप्रदेश के एक हजार शिल्पकारों ने मिलकर इस मंदिर को बनाया। इस कृष्ण-राधा मंदिर का निर्माण जगद्गुरु कृपालु महाराज ने करवाया था। इसकी शिल्पकला देखकर आप दंग रह जाएंगे।

बांके बिहारी मंदिर – वृन्दावन का बांके बिहारी मंदिर एक प्रसिद्ध हिन्दू मंदिर है जिसे महान गायक तानसेन के गुरु स्वामी हरिदास ने बनवाया था। कृष्ण भगवान के इस मंदिर में राजस्थानी शैली की उम्दा नक्काशी देखने को मिलती है।

मदन मोहन मंदिर – वृन्दावन में स्थित मदन मोहन जी का मंदिर वैष्णव संप्रदाय का एक प्रसिद्ध मंदिर है। इस मंदिर से जुड़ी एक कथा प्रचलित है कि एक बार रामदास खत्री नामक व्यापारी की सामान से लदी नाव यमुना में फंस गयी थी जो मदन मोहन जी से प्रार्थना करने पर, उनके दर्शन पाकर बाहर निकली, जिसके बाद रामदास खत्री ने भगवान कृष्ण को समर्पित इस मंदिर का निर्माण करवाया।

निधिवन – भगवान कृष्ण की लीला स्थलियों में से एक प्रसिद्ध स्थली निधिवन मंदिर है। इस स्थान से जुड़ी ये मान्यता प्रचलित है कि यहाँ हर शाम कृष्ण गोपियों संग रास रचाते हैं।

गोविन्द देव जी का मंदिर – वृन्दावन में गोविन्द देव जी का मंदिर भी है जो वैष्णव संप्रदाय का प्रसिद्ध और भव्य मंदिर है। इसका निर्माण ई. 1590 में हुआ। जब मुस्लिम सम्राट औरंगजेब ने इस मंदिर को नष्ट करने की कोशिश की तब गोविंददेव जी को वृन्दावन से जयपुर लाकर प्रतिष्ठित किया गया। जयपुर में स्थित गोविन्द देव जी मंदिर में वृन्दावन मंदिर के मूल देवता विराजते हैं और इस प्रतिमा को श्रीकृष्ण का साक्षात् स्वरूप कहा जाता है।

केसी घाट – वृन्दावन के केसी घाट का भी विशेष महत्व है। भगवान कृष्ण ने अपने बचपन का ज्यादा समय यही बिताया था। इसी घाट पर भगवान कृष्ण ने दुष्ट राक्षस केशी से अपने साथियों की रक्षा की थी।

पागल बाबा मंदिर – मथुरा से वृन्दावन जाते समय, मार्ग में फूल की आकृति का एक विशाल संगमरमर का मंदिर है। इस मंदिर का नाम पागल बाबा का मंदिर है। ये दस मंजिला मंदिर बेहद सुन्दर है। कहा जाता है कि बांके बिहारी अपने भक्त के लिए गवाही देने खुद चले आये थे और उसी भक्त की स्मृति में ये मंदिर बनाया गया।

उम्मीद है कि वृन्दावन जैसे पावन स्थल की यात्रा ने आपको भक्ति और आनंद भाव से भर दिया होगा और आपको वृन्दावन के पर्यटन स्थल की ये जानकारी पसंद भी आयी होगी।

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