इन भारतीयों से हमें प्रेरणा जरुर लेनी चाहिए

हम सभी अपने जीवन में किसी ना किसी से प्रेरणा जरुर लेते हैं। चाहे वह हमारे माता-पिता हो, शिक्षक हो या कोई और आज हम आपको कुछ ऐसे लोगों के बारे में बता रहे हैं जो कोई बड़ी शख्सियत तो नहीं लेकिन इनके बारे में जानकर आप इन से प्रेरणा जरूर लेना चाहेंगे। तो चलिए इन लोगों के बारे में विस्तारपूर्वक जानते हैं।

डॉ. रवींद्र कोल्हे, MD

डॉ रवींद्र सदा से ही गांधी जी के सिद्धांतों के आधार पर ही चलते आए हैं। वह एक बहुत बड़े समाजसेवी के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने अपना सारा जीवन गरीबों की सेवा में व्यतीत कर दिया है। डॉक्टर रविंद्र मेलघाट महाराष्ट्र में मुख्य रुप से अपनी सेवाएं प्रदान करते हैं इस क्षेत्र को चुनने के पीछे कारण यह था कि यह महाराष्ट्र का सबसे पिछड़ा क्षेत्र था। जहां के अधिकांश लोग अत्यधिक रूप से गरीब थे। इस छेत्र में सेवा देते हुए उन्हें करीब 24 साल से भी ज्यादा हो चुके हैं और पिछले 24 साल से वह इलाज के लिए मात्र ₹2 ही लेते हैं और यह ₹2 भी वह मरीजों की दवाइयां खरीदने में खर्च कर देते हैं।

वेंकटरामन

वेंकटरमन चेन्नई से करीबन 410 किलोमीटर दूर एक छोटे से शहर एरोड मैं अपना रेस्टोरेंट चलाते हैं। वहीं पर पास ही में एरोड गवर्नमेंट हॉस्पिटल भी है इस अस्पताल में जो लोग आर्थिक रुप से कमजोर होते हैं वेंकटरमण उन्हें सिर्फ ₹1 में खाना खिलाते हैं।

सिन्धुताई सपकाल

सिन्धुताई के पति ने उनको घर से बाहर निकाल दिया था फिर वह गाय-भैसों के तबेले में जाकर रहने लगी जहां उन्होंने अपनी बेटी को जन्म दिया। इसके बाद वह रेलवे स्टेशन पर रहने लगी और भीख मांगकर अपना भरण पोषण करने लगी। अपनी बेटी की सुरक्षा के लिए वो रात को शमशान में जाकर सो जाती थी। एक दिन उन्हें यह ख्याल आया कि न जाने कितने ऐसे बच्चे होंगे जिनकी मां नहीं होती होंगी और वह अपनी सुरक्षा नहीं कर पाते होंगे। बस उसी दिन उन्होंने यह निर्णय कर लिया कि वह अनाथ बच्चों को पलेंगी। अब तक वह 1000 से भी अधिक बच्चों को गोद ले चुकी है और द मदर ऑफ ओरफेनस के नाम से जानी जाती है।

डॉ टेसी थॉमस

टेसी एक वैज्ञानिक है और वर्तमान में अग्नि फाइव मिसाइल परियोजना की प्रमुख है। आपको बता दें कि डीआरडीओ में प्रक्षेपास्त्र परियोजना में ढाई सौ वैज्ञानिक हैं जिसमें महिलाओं की संख्या मात्र 20 है। डॉक्टर टेसी एपीजे अब्दुल कलाम को अपना आदर्श मानती हैं और भारत में मिसाइल वुमन के नाम से जानी जाती है।

आनदं कुमार

आनंद को दुनिया सुपर 30 के नाम से जानती है। आनंद पटना के रहने वाले हैं और हर साल वह बिहार के 30 बच्चे जो आर्थिक और सामाजिक रुप से पिछड़े हुए थे उनको IIT और JEE मैं दाखिला दिलवाने की तयारी करवाते हैं। वह इन विद्यार्थियों को अपने साथ ही रखते हैं और उनके साथ रहकर उन्हें पढ़ाते हैं इतना ही नहीं वो उनका खर्च भी उठाते हैं। उन्होंने इस प्रक्रिया की शुरुआत 2002 से की थी पहले साल उन्होंने 30 में से 18 विद्यार्थियों को आईआईटी एग्जाम पास करवा दिया था 2004 में 22 2005 में 26 और 2006 में 28 विद्यार्थी आईआईटी जेईई एग्जाम उत्तीर्ण कर चुके थे। 2008 10 में उन्होंने पूरे 30 विद्यार्थियों को एग्जाम पास करवा दिया था अब तक उन्होंने 390 विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान की है जिनमें से 333 विद्यार्थी iit का एग्जाम पास कर चुके हैं।

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