पैरों से लिखने वाली टीचर को हमारा सलाम

इस बच्ची का जन्म बिहार के एक परिवार में हुआ था और जन्म से ही इस बच्ची के दोनों हाथ नहीं थे। उस समय अन्य रिश्तेदारों ने यह सलाह दी थी की इस बच्ची को अभी ही मार डालो मगर माता पिता को यह मंजूर नहीं था।

बसंती नाम की यह लड़की आज एक स्कूल में शिक्षिका हैं मगर उनकी यहाँ तक की राह आसान नहीं थी। पहले तो उनका दाखिला स्कूल में नहीं कराया जा रहा था मगर जब यह हुआ तो उनकी उम्र 6 वर्ष थी। यह बसंती का जज़्बा ही था जो वो स्कूल जा सकी हाँ उन्हें लिखने में बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ा मगर वो मुश्किल भी आसान हो गयी जब उन्होंने पैरों से लिखना सीख लिया।

वो हमेशा से ही यह साबित करना चाहती थी की वो परिवार पर बोझ नहीं है और ऐसा हुआ भी उन्होंने 10 वीं की परीक्षा अच्छे नंबरों से उत्तीर्ण कर ली। इसके बाद वो स्कूल में शिक्षिका के तौर पर नोकरी करने लग गयी। उनके पिता जब रिटायर हुए तो उनके कन्धों पर सारा परिवार का बोझ आ गया लेकिन उन्होंने उसे भी बड़ी आसानी से उठा लिया था।

बसंती का जीवन हमें अपनी मुश्किलों से ना हारने की प्रेरणा देता है। यह हमें सिखाता है की हमें कभी भी अपनी मुश्किलों से हार नहीं माननी चाहिए। बसंती स्कूल में आसानी से ब्लैक बोर्ड पर अपने पैरों से लिख लेती है और सभी छात्रों को अपना पूरा समय देती है।

बसंती के इस हार ना मान लेने वाले जज्बे को हमारा सलाम।

News Source

शेयर करें

रोचक जानकारियों के लिए सब्सक्राइब करें

Add a comment