आप चाहते क्या है? (कहानी)

जनवरी 30, 2016

जीवन में कुछ भी हासिल करने के लिए यह जानना बहुत ही ज़रूरी है, कि हम वास्तव में चाहते क्या हैं और क्यों उस मुकाम तक जाना चाहते हैं? यह मनोरंजक कहानी आपको आपकी चाह जानने और पाने का सूत्र समझाएगी।

कई वैज्ञानिकों के समूह ने मिलकर एक बार एक प्रयोग किया। उन्होनें एक पिंजरा लिया, उस पिंजरें के कोने में कुछ फल लटका दिये और चार बंदर को भी उस पिंजरें में बंद कर दिया। अब हुआ यह कि जब भी कोई एक बंदर फलों की ओर बढ़ता तो बाकी के तीन बंदर भी आगे बढ़ते और पहले बंदर के साथ-साथ बाकी सभी बंदरों पे भी ठंडे पानी की बौछार उस पिंजरें में की जाती थी। कुछ समय बाद इससे हुआ यह कि जब भी कोई एक बंदर लालच में आकर फलों की ओर जैसे ही बढ़ता तो शेष तीनों बंदर उसे मार-पीट के रोक देते।

प्रयोग के दूसरे चरण में वैज्ञानिकों ने उस पिंजरें से एक पुराना बंदर बाहर निकाला और एक नये बंदर को उस पिंजरें में डाल दिया। पिंजरें में अब पानी कि बौछार को भी बंद कर दिया गया। स्‍वाभावनुसार नया बंदर जैसे हो फलों कि ओर बढ़ा, तो बाकी के तीनों बंदरों ने जमकर उस नये बंदर कि पिटाई कर दी। नये बंदर को मार खाने का कारण तो समझ नही आया, लेकिन वो इतना समझ गया था कि फलों की ओर नही बढ़ना है।

तीसरे चरण में वैज्ञानिकों ने फिर से एक पुराना बंदर बाहर किया और एक नये बंदर को पिंजरें के अंदर किया। उसके साथ भी बाकी के तीनों बंदरों ने पिटाई वाला व्यवहार दौहराया, आश्चर्य की बात तो यह थी की इस पिटाई में पिछली बार आया नया बंदर भी शामिल था। हालाकी पिछली बार आयें नये बंदर को यह नही पता था कि पिटाई क्यों की जा रही है। इस तरह एक-एक करके बाकी के दो पुराने बंदर भी बदल दिये गये और एक स्थिति में पिंजरें के सभी बंदर नये हो गये। यानी की इन चारों बंदरों को यह पता भी नही था कि फलों की तरफ बढ़ने पर ठंडे पानी की बौछार झेलनी पड़ती थी। जबकि यह बौछार कब कि बंद हो चुकी थी। फिर भी वे परम्परागत हर नये बंदर को फलों की तरफ बढ़ने से रोकते और पीटते थे।

हम मनुष्यों का व्यवहार भी ठीक इन बंदरों की तरह होता है। हमें यह पता ही नही होता कि जो हम कर रहे हैं वो क्यों कर रहें हैं और उसका कारण क्या है। जीवन की भाग-दौड़ में हम वास्तव में चाहते क्या हैं। हम नौकरी या कोई काम कर रहे हैं, पर क्यों? हम जो भी काम कर रहे हैं, उस काम से हम क्या चाहते हैं? पता ही नहीं। अपने ही बारे में जानकारी के अभाव के कारण हम जीवन में सुख से वंचित रहते हैं और कभी यह काम तो कभी कुछ और, इस तरह भटकते ही रहते हैं। नतीजा यह निकलता है, हम दूसरों से अपनी तुलना करने से भी नही हिचकिचाते- उसके पास यह है, वह इस पद पर है, तो हम क्यों नहीं। ऐसी तुलना से कभी-कभी हमारी इच्छायें तो पूरी हो जाती हैं, लेकिन मन को संतुष्टि कभी नही मिलती। सुख के लिए पहले यह जानने कि कोशिश करें- आप चाहते क्या हैं? यह भी समझना ज़रूरी है आप कि चाह आपकी अपनी हो, किसी ओर के मुताबिक ना हो।

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“पढ़ाई के समय मेडिटेशन के ख़ास महत्व”

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