अंतरिक्ष यात्रा करने के बाद क्या प्रभाव पड़ते हैं शरीर पर

दिसम्बर 1, 2016

पिछले 50 वर्षों से मनुष्य अंतरिक्ष से जुडी खोजों में लगा हुआ है। वर्ष 1957 में सोवियत यूनियन ने सबसे पहला सेटेलाइट स्पेस में भेजा था जिसका नाम स्पुतनिक 1 था। उसके बाद से मानव ने न जाने कितने सेटेलाइट अंतरिक्ष में भेज दिए यहाँ तक की चाँद पर भी मानव को भेजा जा चुका है। इसके अलावा हुब्बेल टेलिस्कोप भी स्पेस में भेजा जा चुका है। अभी हाल ही में यह खबर भी आयी थी की मानव को भी मार्स पर भेज जायेगा जो की प्रथ्वी से बहुत दूर है लेकिन इसमें अभी कई वर्षों का समय लगेगा। लेकिन क्या कभी आपने सोचा है की अंतरिक्ष यात्रा करने के बाद क्या प्रभाव पड़ते हैं शरीर पर? नहीं ना तो चलिए आज हम आपको बताते है की अंतरिक्ष यात्रा करने के बाद मानव के शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है।

हड्डियों का कमज़ोर होना – अंतरिक्ष में यात्रा करने का सबसे बड़ा नुकसान यह है की इस से हड्डिया कमज़ोर होने लगती है। जब तक आप जीवित रहेंगे आपकी हड्डियां दिन प्रतिदिन कमज़ोर होती चली जाएँगी इसका कारण होगा ओसिओकल्टस नामक सेल का अधिक निर्माण। यह आपके खून में अधिक मात्रा में कैल्शियम को बना देगा जिस से आपकी हड्डियां बहुत तेज़ी से कमज़ोर होने लगेगी। यह सब इसलिए होता है क्योंकि अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण शक्ति नहीं होती है और हड्डियों उस प्रकार से काम नहीं करती जैसे धरती पर करती है जिसके कारण कैल्शियम खून में मिल जाता है और हड्डियों को कमज़ोर कर देता है। यह माना जाता है की अंतरिक्ष में व्यायाम करके इस परेशानी से बचा जा सकता है मगर फिर भी आपको यह दिक्कत तो होगी ही क्योँकि अंतरिक्ष इंसानो के रहने लायक नहीं है।

आँखों में तकलीफ होना – वैज्ञानिकों ने 27 एस्ट्रोनॉट्स जो 108 दिन स्पेस पर रहकर आये है पर एक टेस्ट किया जिसमें उनकी आँखों का चेकअप किया गया। इस दौरान यह पाया गया की 22% लोगों की आँखों की पुतलियां पीछे से दब गयी है।

ह्रदय सम्बंधित बीमारी – यह माना जाता है की अंतरिक्ष में ह्रदय अपना आकार बदल लेता है और यह स्फियर के आकार का हो जाता है। यह सब इसलिए होता है क्योँकि अंतरिक्ष में शरीर में खून का सर्क्युलेशन कम हो जाता है। जब यह लोग वापस धरती पर आते है तो इनका ब्लड प्रेशर गिर जाता है जिस से इनको चक्कर आना और थकावट जैसे रोग हो जाते है।

नासा ने 2 एस्ट्रोनॉट्स सकॉट केली और मिखाइल कोर्निएंको को साल भर अंतरिक्ष में रखा और जब वो साल भर बाद धरती पर लौटे तो उनके शरीर में होने वाले बदलावों का अध्ययन किया गया जिससे यह सारी जानकारी मिल पायी। सकॉट केली का जुड़वाँ भाई जो की पृथ्वी पर था उस से सकॉट केली के शारीरिक DNA को मिलाया गया और इनमे होने वाले बदलावों के बारे में पता लगाया गया।

इन सभी अनुसंधानों को इस लिए किया जा रहा है ताकि अंतरिक्ष यात्रा को बहुत ज़्यादा आसान और कम तकलीफदेह बनाया जा सके।

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