मजाक करने की सीमा क्या है?

जीवन में हसी ख़ुशी या मजाक का अपना ही एक महत्व है। मगर कभी कभी लोग इस मजाक की सीमायें लाँघ जाते है। वो यह भूल जाते है की मर्यादा में रहते हुए की गयी बात सदैव से ही एक सुलझे हुए इंसान की निशानी रही है। कई बार ऐसा देखा गया है की एक छोटे से मजाक के कारण लोगों को बहुत भारी नुकसान और आपसी रंजिश झेलनी पड़ती है जिसमे किसी का भी फायदा नहीं है। चलिए जानते है मजाक करने की सीमा क्या है?

1. मज़ाक करना व्यक्ति की समझ पर निर्भर करता है अगर आप किसी को नुक्सान या बेइज्जत करने के लिए मज़ाक कर रहे है तो यह किसी भी लिहाज़ से उचित नहीं है।

2. मज़ाक भी हर किसी से नहीं किया जाता है इसलिए आप उस व्यक्ति की सहनशीलता को परखें फिर ही कुछ संवाद स्थापित करें।

3. कभी भी किसी व्यक्ति के सन्दर्भ की बजाय किसी और बात को मूल बनाकर संवाद करें जिससे किसी की भावनाओं को ठेस न पहुंचे।

4. मज़ाक करते समय पुरुष और स्त्री का भी ध्यान रखें कुछ व्यक्तियों को इसबात की बिलकुल समझ नहीं होती और वो कुछ भी बोल जाते है। फिर बाद में आत्मग्लानि से भर जाते है।

5. जितना सह सकें उतना ही मज़ाक करें कई बार जब आपके खुद के साथ मज़ाक किया जाता है तो आप सह नहीं पाते। सदा सहनशील स्वाभाव रखें यह आपके जीवन को भी उन्मादित रखेगा।

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