आजकल सेहत के प्रति जागरूक होने में तेजी आयी है और इसी के चलते बरसों से इस्तेमाल होने वाली व्हाइट ब्रेड का इस्तेमाल कम हुआ है और उसकी जगह ब्राउन ब्रेड का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। ऐसे में ये जानना बेहतर होगा कि व्हाइट ब्रेड और ब्राउन ब्रेड में क्या अंतर है।

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पोषक तत्व-

ब्राउन ब्रेड गेंहू/होल वीट से बनती है जबकि व्हाइट ब्रेड मैदा से बनी होती है।

होल ग्रेन से बनी ब्राउन ब्रेड, व्हाइट ब्रेड की तुलना में एक पौष्टिक नाश्ता साबित होती है। इसमें फाइबर की प्रचुरता होती है जो डायजेशन को सही रखता है और विटामिन बी-6, विटामिन ई, मैग्नीशियम, फोलिक एसिड, जिंक, कॉपर और मैगनीज भी होते हैं जबकि व्हाइट ब्रेड में फाइबर की मात्रा कम होती है जिसके कारण पाचन सम्बन्धी कई परेशानियां होने लगती है।

व्हाइट ब्रेड में तुलनात्मक रूप से कैल्शियम की ज्यादा मात्रा पायी जाती है।

ब्राउन ब्रेड का ग्लाइसिमिक इंडेक्स कम होता है जिससे ब्लड शुगर अचानक बढ़ने का ख़तरा नहीं रहता है।

कैलोरी-

व्हाइट ब्रेड में चीनी की मात्रा ज्यादा होती है इसलिए इसमें ज्यादा कैलोरी होती है और इसके ज्यादा सेवन से वजन तेजी से बढ़ने लगता है और मोटापे की समस्या हो जाती है जबकि ब्राउन ब्रेड में कम मिठास होने के कारण कैलोरी भी कम होती है।

निर्माण की प्रक्रिया-

व्हाइट ब्रेड को बनाते समय गेहूँ से चोकर और बीज हटा दिए जाते हैं और पोटैशियम, ब्रोमेट, बैंजोल पराऑक्साइड और क्लोरीन डाई ऑक्साइड के साथ ब्लीच मिला दी जाती है। ऐसी ब्रेड का सेवन करने से कई हेल्थ प्रॉब्लम्स होने लगती हैं जबकि ब्राउन ब्रेड बनाते समय गेंहू में से चोकर को हटाया नहीं जाता है जिससे पौष्टिक तत्व बने रहते हैं और शरीर को नुकसान नहीं पहुँचता है।

ब्राउन ब्रेड खरीदते समय ध्यान रखे ये ख़ास बातें-

    • सभी ब्राउन ब्रेड होल वीट से नहीं बनती हैं इसलिए ब्रेड खरीदते समय उसका लेबल जरूर देखें जिस पर सबसे पहले लिखा होना चाहिए- होल वीट या होल मील फ्लोर।
    • अगर ब्रेड के पैकेट पर लिखी सामग्री में कैरेमल लिखा है तो इसका मतलब है कि व्हाइट ब्रेड पर ब्राउन कलर किया गया है।
    • ब्रेड के पैकेट पर लिखी सामग्री कम होनी चाहिए क्योंकि कम सामग्री वाली ब्रेड ज्यादा हेल्दी होती है।

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