भगवान को न मानने वाले सिर्फ नास्तिक नहीं होते

हम में से अधिकतर लोग भगवान को मानते हैं मगर हम में से बहुत कम लोग ये जानते हैं की भगवान को ना मानने वालो के भी कई प्रकार हैं उन्हें सिर्फ नास्तिक कहना भी उचित नहीं होगा और क्या हम नास्तिकता को पूर्ण रूप से समझ पाये हैं? तो आइये इस बात पर हम कुछ प्रकाश डालते हैं।

एक बहुत ही रोचक अध्यन के अनुसार यह पाया गया है की नास्तिकता के 6 प्रकार होते हैं पर उन 6 प्रकारों पर जाने से पहले हम इसके मुख्य 3 प्रकारों को विश्लेषित करते हैं।

नास्तिक (जो भगवान को नहीं मानते) – यानि की वह व्यक्ति जो भगवान या उसकी किसी भी ताकत को नहीं मानता है। पर ये जानता है की भगवान होते हैं।

अज्ञेयवाद (जो भगवान को नहीं जानता) – यानि वह व्यक्ति जो यह भी नहीं जानता की भगवान हैं भी या नहीं। या यह भी कह सकते है की इस विषय के प्रति अल्पज्ञानी है।

उदासीन (वो व्यक्ति जिसे भगवान के होने न होने से कोई फर्क नहीं पड़ता) – यानि इस प्रकार के व्यक्ति को इस बात का कोई फर्क नहीं पड़ता की भगवान होते है या नहीं और हैं भी तो मेरे किस काम के।

चलिए अब इस बात को विस्तार से समझते हैं।

1. बौद्धिक नास्तिक – यह लोग वैसे काफी बुद्धिमान होते हैं और किसी भी धर्म की कमियों को खंगालते रहते हैं। यह लोग अपने ज्ञान को भगवान से बड़ा समझते है और अपनी सोच और अपने द्वारा कही गयी बात के पक्षधर होते है और शायद इसी कारण इनकी धर्म में आस्था नहीं रहती है।

2. नास्तिक कार्यकर्ता – यह लोग कुशल वक्ता होते हैं अपनी बात पर आम सहमति मनवा लेते हैं और यह चाहते हैं जैसे ये भगवान को नहीं मानते वैसे कोई भी न माने। यानि सरल शब्दों में कहा जाये तो लोगों का गलत मार्गदर्शन करते है।

3. अन्वेषक (अज्ञेयवाद) नास्तिक – यह लोग किसी भी तथ्य को जाने परखे बिना बस इस बात को मान लेते हैं की न कोई भगवान है न कोई शक्ति और खुद की बनायी मन गढंत बातों में लगे रहते हैं।

4. विरोधी नास्तिक – ये लोग हमेशा धर्म या वेदों में लिखी गयी बातों का गलत प्रचार-प्रसार करते हैं। अपनी बात मनवाने के लिए हिंसक प्रवर्ति भी अपना सकते हैं।

5. गैर अस्थिक – इस प्रकार के लोग चाहते ही नहीं है की उनका नाम किसी भी धर्म से जोड़ा जाये। न तो इनके विचार अच्छे होते है ना बुरे। ये कुल मिला के कोई राय देना और लेना पसंद नहीं करते हैं।

6. अनुष्ठान नास्तिक – यह वो लोग होते हैं जो खुद को ही भगवान मानते हैं और लोग इनकी पूजा करें उसके लिए सबको प्रेरित करते हैं। इस प्रकार के लोग खुद को देवीय शक्तियों का मालिक मानते हैं और इसी को धर्म के रूप में प्रचारित करते हैं।

आस्तिक और नास्तिक होना अपनी सोच पर निर्भर करता है, हमारा उदेश्य इस लेख के माध्यम से विस्तार में नास्तिकता को विश्लेषित करना है।

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