एरोप्लेन की खिड़कियां गोल आकार की क्योँ होती है?

हम सभी ने कभी न कभी ऐरोप्लाने की यात्रा की है और एक बहुत सहज सी दिखने वाली बात जो शायद हम सब ने नज़रअंदाज़ कर दी वो है एरोप्लेन की खिड़कियां जिसके पीछे विज्ञान छुपा है। तो आइये आज हम इसी बात का विश्लेषण करते हैं की ऐसा क्योँ है।

1. एरोप्लेन के शुरुआती दिनों से ऐसा नहीं था पुराने ज़माने में खिड़कियां चौकोर आकार की हुआ करती थी मगर जैसे जैसे वक़्त बीतता गया यात्रियों की संख्या बढ़ाने के लिए इसकी बनावट में कई बदलाव किये गए। इसका एक पहलु यह था की विमान की गति को बढ़ाया गया था जिस कारण यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखा गया जिसमे खिड़कियां अहम भूमिका निभाती थी।

2. खिड़कियों में मुख्य बदलाव 1950 के बाद आया जब वैज्ञानिकों ने यह बात गंभीरता से ली की विमान हादसों में खिड़कियों की बनावट का एक अहम भूमिका होती है। जैसे ही जेटलाइनर विमान की शुरुआत हुई विमान यात्रा को एक नयी तेज़ी प्राप्त हुई मगर 1950 में सिर्फ खिड़कियों के चौकोर आकार के कारण 2 विमान हादसे हुए जिसमे 50 लोगों की जान गयी। उस समय इस बात का भी बहुत विरोधाभास था की खिड़कियों की वजह से ऐसा हुआ है। मगर समय रहते इस बात को समझ लिया गया।

3. चौकोर खिड़की न रखने का मुख्य कारण है की चौकोर में कोने सबसे जादा कमज़ोर होते है जो हवा के अधिक दबाव को झेल नहीं पाते हैं और टूट जाते हैं। इसी के विपरीत जब हम गोल खिड़की पर वायू के दबाव की समीक्षा करते हैं तो इसमें हर जगह हवा का सही और बराबर दबाव पड़ता है तो टूटने के बहुत कम लक्षण रह जाते हैं।

यह बात बहुत सरल है और आसानी से समझ में भी आ जाती है मगर इसके पीछे छुपा विज्ञान कई लोग नहीं समझ पाते हैं।

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