पहलवानों के कान क्यों होते हैं बाहर की तरफ उभरे हुए?

भारत में कुश्ती एक लोकप्रिय खेल है और यह बात किसी से छुपी हुई नहीं है। पूरे विश्व में भारत के पहलवानों का डंका बोलता है। लेकिन आपने क्या यह बात सोची है कि पहलवानों के कान बाहर की तरफ उभरे हुए क्यों होते हैं? यह हमने देखा तो कई बार है लेकिन शायद ही कोई होगा जो इस बारे में जानता हो तो चलिए आपको इस बारे में तफसील से बताते हैं।

पहलवान को पहलवान बनने के लिए बहुत ही मेहनत कठिन परिश्रम और एक बहुत ही कठिन जीवन जीना होता है। जो कान आप देख रहे हैं यह स्थिति कोली फ्लावर ईयर के नाम से जानी जाती है। दरअसल यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब कानों पर जोरदार घर्षण हो जाए। यह बात किसी से छुपी हुई नहीं है की पहलवानी में शरीर बहुत ही विकट परिस्थिति से गुजरता है।

इस खेल की प्रकृति ही कुछ ऐसी है जिसमें एक इंसान दूसरे इंसान पर हावी होना चाहता है जिसके दौरान वह दूसरे इंसान पर कुछ ऐसे भीषण प्रहार करता है जिससे उसे चोट पहुंचे। कान शरीर का सबसे नाजुक हिस्सा है इस पर हल्का सा प्रहार होने से खाल का एक गुच्छा सा बन जाता है। इसी कारण पहलवानों के कान बाहर की तरफ निकल आते है।

कई बार तो यह भी पाया गया है की इस वजह से पहलवानो के सुनने की क्षमता भी चली जाती है। सिर्फ पहलवानों के कान ही नहीं शरीर के और भी कई हिस्सों में इस खेल की वजह से बहुत दुषप्रभाव पड़ता है।

एक खिलाड़ी की यही पहचान होती है की वो अपने खेल के प्रति इतना समर्पित होता है की उसे उसके आगे किसी भी तरह की चोट और दर्द का अहसास नहीं होता।

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