क्योँ 4 साल में एक बार ही फ़रवरी के महीने होता है 1 दिन ज़्यादा ?

अगर आपको जानकारी नहीं है तो हम बता दें की इस बार फरवरी 29 दिन की है। अब सवाल ये उठता है की हर 4 साल में ही ऐसा क्योँ होता है की फरवरी में 1 दिन ज़्यादा जोड़ दिया जाता है जिससे वो 28 नहीं 29 दिन की हो जाती है जिससे साल में 365 की जगह 366 दिन हो जाते हैं।

तो चलिए इस विषय को थोड़ा विस्तार में विश्लेषित करते हैं । अभी तक हम सब को सिर्फ यह पता था की पृथ्वी को सूर्य का चाकर लगाने में 365 दिन लगते हैं मगर क्या आप यह जानते हैं की पृथ्वी को कुल 365 दिन 5 घंटे 48 मिनट 46 सेकंड लगते हैं जो की कुल मिला के 365 1/2 दिन होता है।

अब अगर कलैंडर को देखें तो यह 365 दिन दर्शाता है जो की जॉर्जियन केलिन्डर द्वारा प्रेरित है। पर हर साल हमारी पृथ्वी कुछ समय ज्यादा लेती है सूर्य का चक्कर लगाने में। इस अतिरिक्त समय को इस एक दिन द्वारा पूरा किया जाता है।

इस समय अवधि को पूरा करने का यही सबसे उत्तम और सरल तरीका था। क्या आप यह जानते हैं की हर साल पृत्वी करीब 6 घंटे ज्यादा लेती है और इस हिसाब से हर 4 वर्ष में इसकी भरपाई एक दिन अतिरिक्त कर के कर दी जाती है। फरवरी सबसे छोटा महीना होता है इसीलिए इस महीने को चुना गया है।

क्या आप ने सोचा है की अगर हम ऐसा न करें तो क्या होगा ? अगर यह बदलाव नहीं किया जायेगा तो हर 100 वर्ष बाद हम 24 दिन पीछे चले जायेंगे।

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