हिंदी दिवस क्यों मनाया जाता है?

सितम्बर 14, 2016

यह बात तो हम सब जानते हैं कि 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रुप में मनाया जाता है। लेकिन यह भी सत्य है कि गए कुछ सालों से मातृभाषा हिंदी का पतन होता जा रहा है और हिंदी को वह दर्जा प्राप्त नहीं है जो उसे होना चाहिए। आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि 14 सितंबर को ही हिंदी दिवस क्यों मनाया जाता है। आपको बता दें कि 1918 में महात्मा गांधी ने हिंदी साहित्य सम्मेलन के दौरान हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए घोषणा की थी उस समय गांधीजी ने हिंदी को जनमानस की भाषा भी कहा था।

14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने यह निर्णय लिया था कि भारत की राज्य भाषा हिंदी ही होगी। लेकिन जब हिंदी को राज्य भाषा का दर्जा दिया गया तो कुछ राज्य अंग्रेजी भाषा को राज्य भाषा का दर्जा देने की मांग करने लगे इस वजह से अंग्रेजी को भी राज्य भाषा का दर्जा देना पड़ा। संविधान सभा ने 14 सितंबर 1949 को ने देवनागरी लिपि में लिखी हिन्दी को अंग्रेजी के साथ राष्ट्र की आधिकारिक भाषा के तौर पर स्वीकार किया था। इसी भाव को हर भारतीय तक प्रचार और प्रसार करने के लिए यह निर्णय लिया गया कि इस दिन को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाएगा। पहली बार हिंदी दिवस 14 सितंबर 1953 में मनाया गया था।

अब तो आप समझ ही गए होंगे की 14 सितंबर को लिए गए इस निर्णय की वजह से ही हिंदी दिवस 14 सितंबर को मनाया जाता है।

 1991 के बाद देश में नव उदारीकरण की आर्थिक नीतियां लागू की गई जिसके अंतर्गत भाषा पर बहुत ही प्रभाव पड़ा और अंग्रेजी को आसानी से लोगों ने भाषा के रूप में इस्तेमाल करना शुरु कर दिया और अंग्रेजी का इस्तेमाल ज़्यादा किया जाने लगा।

हम आशा करते हैं कि आप इस बात से सहमत होंगे कि हम सभी को अपनी मातृभाषा हिंदी में ही वार्तालाप करना चाहिए। यह हमारे देश की पौराणिक पहचान है और शायद ही कोई ऐसा देश होगा जो अपनी मातृभाषा को छोड़ रहा होगा।

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