माफ करना क्यों जरूरी है?

मई 15, 2016

जीवन है तो गलतियाँ होना भी स्वभाविक है। जिंदगी में लोग जाने-अंजाने कई गलतियाँ करते रहते है। भूल होना कोई गलत बात नही है लेकिन भूल को स्वीकार ना करना या क्षमा ना माँगना यह गलत है। आज के दौर में यही सबसे बड़ी विडंबना है लोग दूसरो की गलती को बताने या जताने में देरी नही करते और अपनी भूल को कोई तूल नही देते। जब गलती हमसे हो तो हम उम्मीद करते है कि हमें माफी मिल जाए और गलती दूसरों से हो तो हम नाराज होकर बैठ जाते है और इंतजार करते है कि सामने वाला हमसे आकर माफी माँगे। आज हम अपने लेख में इसी विषय पर चर्चा करेंगे और पूरी कोशिश करेंगे की आप समझ सके की माफ करना हमारे खुद के लिए भी कितना हितकर है। आपने भी सुना होगा अपने अनुभवियों से – ”क्षमा करो और आगे बढ़ो

जब भी हम किसी अपनों से या अपने चाहने वालों से धोखा या चोट खाते है तो उसे भूलना या माफ करना अत्यंत मुश्किल होता है। कई-कई घाव तो जिंदगी भर नही भुलाये जाते चाहे कितनी भी कोशिश करो भूलने की, वो ताज़ा हो जाते है। हमारा मानना है जो लोग हमें दुख पहुंचाते हैं, कई बार उस वक्त वह खुद भी दर्द में होते हैं और वह स्वयं के जख्मो पर आधारित विकल्प और निर्णय करते हैं जिससे हमें चोट पहुँचती है। हमारा मानना यह है कि दूसरों को माफ करना सबसे शक्तिशाली और प्यार भरा अनुभव है। क्षमा दान से हमारा मन भी शांत हो जाता है और हमारे सोच-विचार की निर्णय शक्ति भी सकारात्मक बन जाती है। यह विचार आपका जरूर मार्गदर्शन करेगा – ‘‘त्रुटी करना मानवीय है; माफ करना ईश्वरीय

पर प्रश्न यह है की आखिर हम दूसरों को माफ़ क्यों नही कर पाते? क्योंकि हमारा मन बार-बार इस बात को याद रखता है जब उन लोगो ने हमे इतना दुख-दर्द दिया तो हम क्यों माफ करे, आखिर हमारी गलती क्या थी? यह कुछ कारण है जिससे हमें दूसरों को माफ कर देना चाहिए और ज़िन्दगी में आगे बढ़ना चाहिए। क्योंकि हम अगर गलतियों को माफ करने की या भूलने की आदत नही डालेंगे तो एक दिन यह जीवन शिकयतों के साथ ही ख़त्म हो जायेगा और हम अपने बच्चों को विरासत में क्षमा का पाठ नही बल्कि अभिमान और बदले की सीख देके जाएँगे। क्या आप इस बात को मानते है कि आपसे कभी कोई भूल नही हुई? ऐसा कभी नही हो सकता। आख़िर हम एक इंसान है भूल होना स्वभाविक है।

क्या आप लोग दूसरों को माफ करने में यकीन रखते हैं या नहीं? एक बात हमेशा ध्यान में रखिए दूसरों को माफ करना हर किसी के बस की बात नहीं। एक सच्चा इंसान वही होता है जो दूसरों की फीलिंग की भी इज्ज़त करे। जीवन में वही इंसान सफल होता है जिसने सभी का प्यार जीता हो। जब आप किसी को माफ करते हो तो इसका मतलब यह होता है कि आपने सामने वाले इंसान के दिल में अपने लिए एक अलग जगह बना ली है। फिर वही लोग एक दिन आपके साथ सुख-दुःख में भी खड़े होंगे। क्षमा करने का मतलब है रात गई बात गई। इस विचार के साथ आप हमेशा अपने आपको हल्का महसूस करेंगे और खुश रहेंगे।

अपने जीवन का कोई ऐसा पल याद कीजिए जब आपने बिना किसी चाह से किसी की मदद की हो। ईश्वर ने इंसान को अनेक अच्छाइयों से नवाजा है। उन अच्छाइयों में से एक अच्छाई है परोपकार की, जिससे हम दूसरों की सहायता करते है। हम अपनी लाइफ में लोगों की मदद कई बार और कई तरह से करते हैं पर सोचने वाली बात ये है कि ये मदद कितनी बार बदले में कुछ न पाने की भावना से प्रेरित होती है। न चाहते हुए भी कहीं न कहीं हमारे मन में एक एक्सपेक्टेशन या उम्मीद जन्म ले लेती है कि हमें भी इस उपकार के बदले में ज़रूर कुछ मिलेगा। ज्यादा कुछ नहीं तो बदले में एक शुक्रिया की उम्मीद तो हो ही जाती है। तो ऐसा कौन सा उपकार है जो इस तरह की उम्मीद या भावना से परे है? ऐसा कौन सा उपकार है जो दूसरों के लिए तो अनमोल है पर उपकार करने वाले के लिए बहुत ही आसान और सस्ता… वो उपकार है किसी को किसी की ग़लती के लिए क्षमा कर देना।

आइये जाने क्यों है जरूरी किसी को माफ करना-

1. माफ करते ही हम सामने वाले को स्वयं पर कार्य करने की अनुमती दे देते हैं – जीवन में कोई भी व्यक्ति कभी भी पूर्ण नहीं होता। जीवन में कई पल हमारे सामने भी आये होंगे जब हमने भी अपना कंट्रोल खोया होगा और दूसरो को दुःख पहुँचाया होगा। कभी हमने स्वार्थ के कारण भी कुछ गलत किया होगा। तो क्या हमें दूसरा मौका नहीं मिलना चाहिए अपनी गलतियों को सही करने का? जब हमें हमारी भूल के लिए क्षमा मिलती है तो इसका मतलब है हमें एक मौका और मिला है स्वयं पर फिर से काम करने का और खुद को सही साबित करने का। क्योंकि जब तक दूसरे लोग हमें माफ नहीं करेंगे तो हम कभी अपनी गलती पर विचार और सुधार नहीं कर पाएंगे। ठीक इसी तरह आप भी सामने वाले को माफ करें और उन्हें स्वयं पर कार्य करने का मौका दें।

किसी को भूल के लिए माफ करना और आत्मग्लानि से मुक्त करना एक बहुत बड़ा परोपकार है। इस प्रक्रिया में क्षमा करने वाला क्षमा पाने वाले से कहीं अधिक सुखी होता है। जरा आप ही सोचे गलती चाहे छोटी हो या बड़ी उसे कभी भी पास्ट में जा कर नही सुधारा जा सकता। भविष्य को सुखी बनाने के लिए वर्तमान में क्षमा से अधिक कुछ नहीं हो सकता। अगर आप किसी की भूल को माफ करते हैं तो उस व्यक्ति के साथ आप स्वयं की भी सहायता कर रहे हैं।

2. दूसरों को माफ करके हम खुद को क्षमा करते है – आप और हम इस बात को भली भाती जानते है की हम अपनी ईगो के रहते दूसरों को कभी माफ़ नहीं कर पाते और इस बोझ तले जीवन को जीते जाते है। क्योंकि जो लोग हमें दर्द देते है हम उन्हें भी दुखी देखना चाहते हैं। हमारी यही सोच हमें खुशी के साथ जीने नही देती। यह अटल सत्य है किसी के दर्द की नीव पर हम अपने खुशी का आशियाना नही बना सकते। इसलिए हमें दूसरों को माफ करने में सदा आगे रहना चाहिए तभी हम अपने आप को भी माफ कर पाएंगे।

दूसरों को माफ करने वाला आदमी हमेशा बड़ा होता है और इसके लिए साहस भी चाहिए। माफ कर देने से आपका और सामने वाले, दोनों का भला होता है और दोनों की ज़िन्दगी हल्की हो जाती है। क्या आप अपनी ज़िन्दगी को भार के साथ जीना पसंद करेंगे? कभी नही! इसलिए दूसरों को माफ करके अपना बोझ हल्का कीजिये और जीवन का आनंद लीजिए। क्षमा ना करना एक ऐसी बीमारी है जिसका शारीरिक और मानसिक ख़ामियाजा सबसे ज़्यादा वही उठाता है जो माफ करना नही जानता। क्षमा करने के लिए व्यक्ति को अपनी ईगो से ऊपर उठने की आवश्यकता है और यह एक कठिन प्रक्रिया है लेकिन नामुमकिन नही है। एक सहनशील और दयालु व्यक्ति ही इसे कर सकता है। कभी सोचिए अपनी रोज़ की ज़िन्दगी में हम कितनो को क्षमा करते हैं और कितनो से क्षमा प्राप्त करते हैं।

3. माफ करने से जीवन आगे की ओर उन्मुक्त होता है – जीवन की कोई भी भूल या स्थिति पूरे जीवन का हिस्सा नहीं बन सकती। जीवन के कई पल हमें शिक्षा देने आते है कि हम उस स्थिति का सामना करे। क्षमा मांगे व क्षमा करें और अपनी ज़िन्दगी में आगे बढ़े। एक नये दिन के साथ एक नया अध्याय शुरू करें। दूसरों को माफ करने से हम उनकी ज़िन्दगी में एक अलग जगह बना लेते है। कितना आसान है किसी से एक शब्द क्षमा कह कर आगे निकल जाना और ये सोच लेना कि उस व्यक्ति ने अब हमें माफ कर दिया है। जरा सोचिए, क्या होता अगर हमारे माता-पिता हमारी गलतियों को क्षमा नहीं करते? क्या हो अगर ईश्वर हमें हमारे अपराधों के लिए माफ करना छोड़ दें। इसलिए अगर हम किसी को क्षमा नहीं कर सकते तो हम ईश्वर से अपने लिए माफ़ी की उम्मीद कैसे कर सकते हैं? क्षमा देना या लेना एक ही सिक्के के दो पहलू है। अगर आपको अपने जीवन में सामने वाले से ज्यादा सफल होना है तो इसका इंतजार ना करें कि वो हमसे पहले क्षमा मांगे। आप अपनी तरफ से उसे क्षमा कर दें और आगे बढ़े। यकीन मानिए ऐसा करके आप स्वयं का ही भला कर रहे है।

4. क्षमा के बदले दूसरों से क्षमा ही मिलती है – जीवन एक संघर्ष है। सब कुछ हमेशा सही या हमारे अनुकूल ही हो यह आवश्यक नही। हो सकता है आप और सामने वाला व्यक्ति एक दूसरे से एक ही बात से या एक दूसरे के रवैये से नाराज़ हो और यह भी हो सकता है की आप दोनों ही किसी गलतफहमी के शिकार हो। आपकी परिस्थिति का लाभ कोई अन्य लें उससे पहले एक दूसरे को माफ करें। जब हम दूसरे को माफ करते हैं तो दूसरों में भी आपको माफ करने की शक्ति आ जाती है। अगर हम उसी बात को ताउम्र तक पकड़े रखेंगे तो हम स्वयं ही अपने जीवन को कठिन बना देंगे। इसलिए अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए दूसरों को माफ़ कर दें।

किसी महान विचारक ने कहा है कि ”किसी को किसी की भूल के लिए माफ ना करना बिल्कुल ऐसा ही है जैसे ज़हर खुद पीना और उम्मीद करना कि उसका असर दूसरों पर हो” सोचिये कि अगर क्षमा नाम का परोपकार इस दुनिया में ना होता तो कोई किसी से कभी प्रेम ही नहीं कर पाता। क्योंकि ”बिना क्षमा के कोई प्रेम नहीं है और बिना प्रेम के कोई क्षमा नहीं है”

5. क्षमा के बिना आध्यात्मिक विकास संभव नही – हमारा आध्यात्मिक ज्ञान हमें यही सिखाता है कि हमें दूसरों को माफ करना आना चाहिए तभी हमारा सही विकास होता है। घृणा, नफ़रत, द्वेष और कड़वाहट की भावनाओ के साथ हम अध्यात्म की सीढ़ी नहीं चढ़ सकते। हमारे द्वारा जब किसी को माफी मिलती है तो हम अध्यात्म की एक सीढ़ी पार कर लेते हैं। दूसरों को माफ करने भर से हमारे मन में एक पॉज़िटिव एनर्जी पैदा होती है जो हमें आंतरिक शुकून देती है। फिर धीरे-धीरे हमारी सोच भी सकारात्मक बन जाती है। इस सारी प्रक्रिया में कब हमारे दिल का बोझ हल्का हो जाता है पता ही नही चलता। हमारा मानना है हमारे लिए अगर सबसे ज्यादा कुछ महत्वपूर्ण है तो वो है हमारी खुशी। वैसे तो कई परोपकारी कामों से हमें खुशी मिलती है, लेकिन किसी को माफ कर देने से बड़ा कोई परोपकार नही। आप एक बार किसी को दिल से माफ करके तो देखिए आपको आंतरिक खुशी की अनुभूति अवश्य होगी। इस विचार को सदैव याद रखें।

”जब आप माफ करते हैं तब आप भूत को नहीं बदलते हैं, लेकिन आप निश्चित रूप से भविष्य को बदल देते हैं”

6. क्षमा करने वाला व्यक्ति सदैव प्रसन्न रहता है – एक प्रसन्नचित व्यक्ति कभी भी दूसरों को अप्रसन्न नहीं देख सकता। ऐसा आपने सुना भी होगा जिसके पास जो होता है वो वहीं दूसरों को देता है। जो चीज़ आप के पास है ही नही वो आप कैसे दे सकते है? जैसा कि आम के पेड़ से हमेशा आम ही प्राप्त करने की उम्मीद की जाती है ना की दूसरें फल की। अगर आप अन्दर से पॉज़िटिव और खुश हैं तो आप अपने आस-पास खुशी और पॉज़िटिविटी ही फैलाएंगे। ये बात सदा याद रखिए ”मूर्ख व्यक्ति ना क्षमा करते हैं न भूलते हैं, अनुभवहीन व्यक्ति भूल जाते हैं, पर क्षमा नहीं करते, लेकिन एक दयालु और समझदार व्यक्ति क्षमा कर देता है पर भूलता नहीं”

अगर आप अपनी रोजमर्रा की ज़िन्दगी में लोगों को क्षमा करते जाते हैं तो ये आप का अनजाने में उनपर किया गया सबसे बड़ा उपकार ही होता है, जिसकी आपको कोई भी कीमत नहीं चुकानी पड़ती। इस तरह से आप दूसरों के लिए प्रेरणादायक बन जाते है।

कहा भी गया है–

”तारीफ उन शब्दों में नही जो आपके सामने कहे जाएं,
तारीफ तो उन शब्दों में है जो आपके पीछे से कहे जाएं”

दोस्तों, अंजाने में भी कभी किसी के आत्मसम्मान को ठेस मत पहुचाओ। इन्सान चाहे छोटा हो या बड़ा, हर किसी का अपना आत्मसम्मान होता है। इसलिए किसी को गलती का एहसास दिलाने का सबसे अच्छा उपाय यह है कि आप खुद को भी उस गलती का हिस्सा बनाएं। मान लीजिए, जब आपके किसी कर्मचारी से कोई काम गलत हो जाये तो उसे सीधा उसकी गलती दिखाने के बजाय यह कहना ज्यादा उचित होगा की “हम लोगों से जो गलती होती आई है शायद भविष्य में यह हम पर बहुत भारी पड़ सकती है। हमें इसे समय रहते ठीक करने के लिए फलाँ-फलाँ काम और मेहनत करनी होगी जिससे आगे जाके हम सबको और हमारी कंपनी को कोई नुकसान ना उठाना पड़े।”

इस तरह से सामने वाले को अपनी भूल महसूस भी होगी और आपके लिए सम्मान भी बढ़ जायेगा। क्योंकि उसे यकीन हो जायेगा कि आप हर समस्या में उसके साथ हैं और अगली बार वह हमेशा यही कोशिश करेगा कि आपको बिना कोई शिकायत के ज्यादा मुनाफा दिलवाए। ठीक इसके विपरीत अगर आप सामने वाले को कुछ ग़लत कहते तो बात बढ़ सकती थी, माहौल नकारात्मक हो सकता था, फिर अहंकार ना तो क्षमा करने देता और ना ही मांगने देता। हर तरह से परिस्थिति विपरीत होती।

माफ करना अँधियारे में उजाला करने जैसा होता है, जिसके प्रकाश में दोनों एक दूसरे को और करीब से जान पाते है। क्षमा से आप किसी को एक मौका देते हैं अपनी अच्छाइयों को साबित करने का। जरा सोचिये, अगर कौरव अपनी भूल मानकर क्षमा मांग लेते तो शायद महाभारत के उस युद्ध में इतना विनाश ना हुआ होता। तभी तो कहा जाता है इस दुनिया से जाने वाले को हमेशा क्षमा कर देना चाहिए। क्या सचमुच इसलिए कि उस इंसान को फिर कभी माफ़ी मांगने का मौका नहीं मिलेगा या इसलिए कि आपको फिर उसे कभी माफ करने का मौका नहीं मिलेगा?

अगर हमारी माफी से किसी के ज़िन्दगी की सूखी ज़मीन पर आशाओं और मुस्कुराहटों के फूल खिल उठें तो इससे अच्छी बात और क्या हो सकती है। यह खूबी इंसान में इंसानियत को जगाये रखती है। जीवन बहुत छोटा है गीले-शिकवे में क्यों बर्बाद करें। यह पंक्तियाँ आपको जरूर प्रेरणा देगी –

”एक छोटी सी लड़ाई से हम अपना प्यार खत्म कर लेते है
इससे तो अच्छा है कि हम प्यार से अपनी लड़ाई को खत्म कर लें”

तो दोस्तों, ज़िन्दगी में रुठिये, मनाइए, शिकवे-शिकायत और मोहब्बत भी कीजिये पर जरा दिल की भी सुनिए.. ‘ज़रा सा माफ भी कीजिये’!!! क्षमा करने के लिए आपको कहीं जाने की आवश्यकता नही है आप जहां रहते है वहीं से बड़ा दिल रखते हुए सामने वाले को माफ कर दें और कुछ चीज़े ईश्वर पर छोड़ दे। क्योंकि हम ईश्वर नही है जो किसी की भूल का फैसला करें। आप इस मूलमंत्र को सदैव याद रखे आपको आत्मीय शांति मिलेगी – भूल इंसान की प्रवृति है, तो क्षमा भी इंसान की संस्कृति है।

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