माँ का दूध क्यों जरूरी है नवजात शिशु के लिए?

मार्च 13, 2016

शिशु के जन्‍म के पश्‍चात स्‍तनपान एक स्‍वाभाविक क्रिया है। स्‍तनपान के बारे में सही ज्ञान के अभाव के कारण बच्‍चों में कुपोषण एवं संक्रमण जैसे रोग हो जाते है। स्तनपान की प्रक्रिया शिशु के लिए संरक्षण और संवर्धन का काम करता है। माँ का दूध बच्चे के लिए केवल पोषण ही नहीं बल्कि जीवन की अमृत धारा है, इससे मां और बच्चे के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। डॉक्टर कि सलाहनुसार शिशुओं को जन्म के पश्चात छ: महीने तक केवल माँ का दूध पिलाने की सलाह दी जाती है। स्तनपान के प्रति प्रोत्साहन और जन जागरूकता लाने के कारण अगस्त माह के प्रथम सप्ताह को पूरे विश्व में स्तनपान सप्ताह के रूप में मनाया जाता है।

बाल्यकाल में होने वाली निमोनिया बीमारी को रोकने में माँ का दूध बहुत महत्वपूर्ण योगदान देता है। विश्व भर में सबसे अधिक बच्चों की मृत्यु का कारण निमोनिया है। आकड़ों के अनुसार प्रतिवर्ष 1.6 करोड़ बच्चों की मृत्यु निमोनिया रोग से हो जाती है। इन आकड़ों की श्रेणी में अधिकांश विकासशील देश है। भारत वर्ष में प्रति वर्ष लगभग 40,000 से अधिक 5 वर्ष से कम के आयु के बच्चों की मृत्यु निमोनिया रोग से होती है। केवल स्तनपान ही बच्चों को अनेक प्रकार के रोगों से विशेषकर निमोनिया से लड़ने की क्षमता प्रदान कर सकता है। माँ का दूध ही शिशु को अनेक पोषक तत्व देता है साथ ही इम्यूनोग्लोबिन, प्रतिरोधक तत्व भी प्रदान करता है। इन तत्वों से शिशुओं को “वसननली” संबंधित रोगों से लड़ने की क्षमता मिलती है तथा इनके द्वारा बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी वृद्धि होती है।

क्यों जरूरी है स्तनपान?

माँ का दूध सर्वोतम आहार क्यों है?

माँ के दूध में सभी तरह के जरूरी पोषक तत्व जैसे – एंटी बाडीज, हार्मोन, प्रतिरोधक कारक और ऐसे आक्सीडेंट पूर्ण रूप से मौजूद होते हैं, जो नवजात शिशु के बेहतर विकास और स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। जन्‍म के पश्चात छः माह तक शिशु को माँ के दूध के सिवाय पानी का कोई ठोस या तरल आहार नहीं देना चाहिए क्योंकि माँ के दूध में प्रचुर मात्रा में पानी होता है। जिससे छः माह तक के बच्‍चे को हर मौसम में पानी की पूर्ति माँ के दूध से ही हो जाती है। छः माह के अंतराल में शिशु को पानी का सेवन कराने से शिशु का दूध पीना कम हो जाता है। परिणाम स्वरूप शिशु में संक्रमण का ख़तरा बढ़ जाता है। प्रसव के कुछ अंतराल बाद बच्चे को स्तनपान करा देना चाहिए। क्योंकि माँ के प्रथम दूध (कोलोस्‍ट्रम) में गाढ़ा, पीला दूध आता है, जिसे शिशु जन्‍म से लेकर कुछ दिनों तक सेवन करता है। इस प्रथम गाढ़े दूध में विटामिन, एन्‍टीबॉडी, अन्‍य पोषक तत्‍व काफी अधिक मात्रा में होते हैं जिससे बच्चों में रतौंधी जैसे रोगों के होने का खतरा भी टल जाता है।

क्या है स्तनपान के लाभ?

स्तनपान के अनेका-अनेक फ़ायदे है। नवजात शिशु के लिए माँ के दूध से बेहतर और कोई विकल्प हो ही नही सकता। इससे माँ और बच्चे को अनेक लाभ मिलते है। स्तनपान के कई फ़ायदे हैं –

नवजात शिशु के लिए माँ का दूध कितना अनिवार्य है, इससे आप अब अच्छे से परिचित है। लेकिन, अफसोस तो इस बात का है विगत कई वर्षो में महिलाओं में यह भ्रांति घर कर गई है कि स्तनपान से उनका फिगर बिगड़ता है जिससे महिलाएं स्तनपान से परहेज करने लगी है। अब सवाल यह उठता है कि, क्या वास्तव में महिलाओं में स्तनपान को लेकर मातृत्व के मायने बदल रहे है। माताओं के भ्रम को दूर करने, स्तनपान के प्रति जागरूकता व महत्वता लाने के उद्देश्य से हमने यह पोस्ट प्रसारित कि है। हम मानते है कामकाजी महिलाओं के लिए यह बहुत ही मुश्किल दौर होता है लेकिन परिवार के सहयोग से आप अपने बच्चे के लिए एक बेहतर विकल्प का चुनाव करे।

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