दुनिया के कुछ ऐसे राज जो आज तक विज्ञान भी नहीं सुलझा पाया

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यूं तो दुनिया में न जाने कितने ऐसे राज हैं जो आज तक खुल नहीं पाए हैं और इन रहस्यों को आज तक वैज्ञानिक भी नहीं सुलझा पाए हैं। आइए आपको बताते हैं दुनिया के ऐसे ही कुछ अनसुलझे रहस्यों के बारे में।

गेट ऑफ सन, बोलिविया

बोलीविया में टिवानाकु नामक एक शहर है जो काफी रहस्यमई है। हजारों साल पहले यह शहर बहुत आबाद हुआ करता था और यहां एक गेट भी बना हुआ है। लेकिन यह इलाका किस सभ्यता द्वारा विकसित किया इसका आज तक वैज्ञानिक भी पता नहीं लगा पाए हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार यह गेट इसलिए बनाया गया होगा कि इसकी मदद से ग्रहों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सके।

योनागुनी का डूबा शहर, जापान

गोताखोरों ने पानी के अंदर इस विशाल ढांचे को खोजा। वैज्ञानिकों के अनुसार यह ढांचा करीब 10000 साल पहले डूबा है और यह ढांचे पाषाण युग के इंसानों द्वारा बनाए गए हैं लेकिन पुख्ता तौर पर इन बातों का राज आज तक वैज्ञानिक भी पता नहीं लगा पाए हैं।

मोहनजोदड़ो, पाकिस्तान

पाकिस्तान के सिंधु नदी के किनारे सन 1922 में यह पौराणिक शहर मोहनजोदड़ो के अवशेष खोजे गए। दिखने में यह शहर बहुत समृद्ध लगता है लेकिन यह शहर कैसे नष्ट हुआ और यहां रहने वाले सभी लोग कैसे मारे गए इसका जवाब आज तक कोई नहीं खोज पाया है। यहां कई बार खुदाई हो चुकी है लेकिन मोहनजोदड़ो का राज आज भी सभी के लिए राज बना हुआ है।

लॉन्स ओ मेदो, कनाडा

कहा जाता है कि हजारों वर्ष पूर्व यूरोपीय इंसान पहली बार उत्तरी अमेरिका पहुंचे थे तब उन्होंने यहां अपनी एक बस्ती बनाई थी जो आज भी देखी जा सकती है।

पत्थर की विशाल गेंदे, कोस्टा रिका

एक बार सन 1930 में केले के पौधों की रोपाई के दौरान यहां पत्थर की बड़ी बड़ी गेंदे मिली थी जो बिल्कुल गोल है। लेकिन इसका पता आज तक नहीं लग पाया है कि यह गेंदें किसने बनाई और इसके पीछे उनका क्या मकसद था। हालांकि कुछ पौराणिक कथाओं के अनुसार कहा जाता है की इन गेंदों में सोना है।

अधूरा स्तंभ, मिस्र

उत्तरी मिस्र के असवान की जमीन में एक विशाल पत्थर खोजा गया जिसमे दरार पड़ी थी। यह स्तंभ करीब 42 मीटर लंबा और करीब 1200 टन वजनी है। इतिहासकारों का मानना है कि यह पत्थर प्राचीन समय में निर्माण के लिए काम में लिया जाने वाला पत्थर है लेकिन इसमें दरार पड़ने के कारण इसे ऐसे ही छोड़ दिया गया। लेकिन आश्चर्यजनक बात यह है कि इतना विशाल और भारी स्तंभ उठाया कैसे जाता होगा।

साकसेगेमन मंदिर, पेरु

यह एक प्राचीन मंदिर है जहां बड़े-बड़े पत्थरों की एक दीवार बनी है और आश्चर्य की बात यह है कि इस दीवार में लगे पत्थरों को जोड़ने के लिए किसी भी चीज का इस्तेमाल नहीं किया गया है। यह पत्थर सिर्फ एक दूसरे के ऊपर रखे हैं और इतनी बारीकी से तराशे गए हैं कि यह टस से मस नहीं होते। लेकिन यह पत्थर उस समय किसने और कैसे तराशे इसका आज तक कोई पता नहीं लगा पाया है।

मोआ के पंजे, न्यूजीलैंड

कहा जाता है करीब 1500 साल पहले माओरी कबीले के लोगों ने न्यूजीलैंड पहुंचकर माओ परिंदों का जमकर शिकार किया था। यूँ तो माओ परिंदे अब पूरी तरह से लुप्त हो चुके हैं लेकिन न्यूजीलैंड में आज भी इनके पंजे देखे जा सकते हैं।

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