क्या आपके फेसबुक के दोस्त वाकई में आपके दोस्त है?

आज के इस डिजिटल युग में शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति बचा होगा जो फेसबुक पर ना हो। अधिकांश लोग आज के समय में इस सोशल मीडिया वेबसाइट का इस्तेमाल कर रहे हैं । हम सभी के इस पर काफी दोस्त हैं पर सवाल यह उठता है क्या वाकई में फेसबुक के दोस्त आपके असली दोस्त हैं? क्या आप के मुसीबत में पड़ने पर यह फेसबुक के दोस्त आपकी मदद करेंगे?

यह सभी सवाल आज से कुछ समय पहले एवोलुशनरी साइकोलॉजी के प्रोफेसर रोबिन दुंबर के मन में भी उठे थे जिसका मूल प्रश्न यह था की जिस प्रकार हमारे सामाजिक व्यवहार में इन वेबसाइट्स की वजह से बदलाव आया है क्या वो परिवर्तन हमे आने वाले समय में बाधित करेगा।

इसी बात को ध्यान में रखते हुए उन्होंने एक शोध किया जिसमे उन्होंने पाया की 3365 लोगों में जिनकी आयु 18 से 65 वर्ष के बीच है औसतन हर व्यक्ति के 150 दोस्त है। पर जब इन लोगों से पुछा गया की आप किन लोगों के घनिष्ट मित्र हैं तो यह पाया गया औसतन हर व्यक्ति सिर्फ 28 व्यक्तियों को ही जनता था।

पर जब यह सवाल किया गया की अगर आप किसी समस्या में फसे हों और आपको किसी दोस्त की जरूरत है तो आप के फेसबुक वाले दोस्तों में से कितने ऐसे लोग हैं जो मदद करेंगे तो जवाब था औसतन 4 व्यक्ति।

इस शोध से यह बात भी सिद्ध हो गयी की औसतन हर व्यक्ति बस दोस्त बनाये जा रहा है जिसका कोई महत्व नहीं है। इस शोध के अनुसार यह बात भी कही गयी की अगर आपको फेसबुक पर दोस्त बनाने भी हैं तो बस उन्ही लोगों से जुड़ें जो आपके भावनात्मक संपर्क में हैं।

अति किसी भी चीज़ की बुरी होती है हम इन वेबसाइट्स पर जिस समाज से जुड़े हैं उसका वास्तविकता में कोई मूल्य नहीं है। इस लेख को लिखने का अर्थ सिर्फ आपको जागरूक करना था किसी को भावनात्मक रूप से ठेस पहुँचाने का हमारा मकसद बिलकुल नहीं है।

“फेसबुक हमारे जीवन में डाल रहा है ये बुरे प्रभाव, जरूर जानें”

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